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महाराजगंज की नाक के नीचे सरकारी आदेश तार-तार, सुबह 6 बजे से ही छलक रहे जाम!

रेहरवां में 'मधुशाला' का खेल: सुबह की पहली किरण के साथ ही शुरू होती है अवैध वसूली।

अजीत मिश्रा (खोजी)

🥃खाकी और आबकारी की ‘शरण’ में फल-फूल रहा अवैध मधुशाला का खेल!🥃

  • रेहरवां: सुबह 6 बजे से सज रही सुराप्रेमियों की चौपाल, सरकारी नियम कागजों तक सीमित
  • खाकी की सरपरस्ती में ‘ओवररेट’ का धंधा? रेहरवां शराब दुकान पर नियम ताक पर।
  • आबकारी विभाग की मौन सहमति: सुबह 10 का नियम, सुबह 6 बजे से ही काम!
  • सनसनीखेज: “सुबह 6 बजे से शराब की होम डिलीवरी? देखें रेहरवां का वायरल सच!”
  •  “महाराजगंज चौकी प्रभारी और आबकारी विभाग सो रहा, या जानबूझकर आंखें मूंदे खड़ा है?”
  •  “प्रति पाउच ₹10 एक्स्ट्रा! आखिर किसकी जेब में जा रहा है रेहरवां की अवैध कमाई का हिस्सा?”

07 अप्रैल, 2026, उत्तर प्रदेश।

बस्ती/कप्तानगंज।। उत्तर प्रदेश सरकार के सख्त आदेश हैं कि शराब की दुकानों का संचालन सुबह 10 बजे से पहले नहीं होगा, लेकिन बस्ती मंडल के कप्तानगंज थाना अंतर्गत महाराजगंज चौकी क्षेत्र में नियम-कानून केवल फाइलों में दबे नजर आ रहे हैं। रेहरवां स्थित देसी शराब की दुकान पर इन दिनों सरकारी घड़ी नहीं, बल्कि ‘मोटा मुनाफा’ और ‘सांठगांठ’ का पहिया घूम रहा है।

रेहरवां में सुबह 6 बजे से ही दुकान के पीछे के दरवाजे से शराब की बिक्री का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो स्पष्ट करता है कि शराब विक्रेता को न तो शासन का भय है और न ही प्रशासन का। जहाँ आम जनता सोकर उठती है, वहां रेहरवां में शराब विक्रेता सुराप्रेमियों की भीड़ जुटाकर अवैध कमाई की नींव रख चुका होता है।

🎯5 से 10 रुपये की ‘अतिरिक्त वसूली’ का खेल

सूत्रों की मानें तो यह सुबह की अवैध सेवा मुफ्त नहीं है। प्रति पाउच पर 5 से 10 रुपये का ‘एक्स्ट्रा चार्ज’ वसूला जा रहा है। सुबह-सुबह तलब मिटाने वाले ग्राहक भी मजबूरी में यह मोटी रकम चुका रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इस अवैध वसूली का हिस्सा कहां-कहां तक पहुंच रहा है? क्या यह ‘मोटी रकम’ केवल विक्रेता की जेब में जा रही है या इसके संरक्षणदाता भी इसमें हिस्सेदार हैं?

🎯आबकारी और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल

क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आबकारी विभाग और महाराजगंज चौकी प्रभारी की कथित मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव नहीं है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं या भ्रष्टाचार को मौन सहमति दे दें, तो कार्रवाई की उम्मीद किससे की जाए? आखिर क्यों महाराजगंज पुलिस और आबकारी के सिपाही इस ‘खुलेआम चुनौती’ को देख कर भी अनदेखा कर रहे हैं?

🎯भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ेगी कार्रवाई या होगा न्याय?

रेहरवां के शराब विक्रेता का बढ़ता मनोबल इस बात का प्रमाण है कि उसे ऊपरी हाथ का सहारा प्राप्त है। अब जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है:

  • क्या जिला प्रशासन इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर दुकान का लाइसेंस निरस्त करेगा?
  • क्या उन अधिकारियों पर गाज गिरेगी जिनकी नाक के नीचे यह अवैध कारोबार चल रहा है?
  • या फिर, हर बार की तरह ‘लेन-देन’ के जरिए मामले को रफा-दफा कर फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

बस्ती जिले के आला अधिकारियों की चुप्पी अब संदेह के घेरे में है। कप्तानगंज का यह मामला अब जिले में चर्चा का विषय बन चुका है। अब देखना यह है कि ‘खोजी’ पत्रकारिता के इस खुलासे के बाद शासन की नींद टूटती है या भ्रष्टाचार की यह मधुशाला यूं ही चलती रहेगी।

रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल

07 अप्रैल, 202

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